क्या जय श्री राम की जगह जय बजरंगबली सांप्रदायिक राजनीति को ही मजबूत करता है? क्या CAA और शाहीन बाग पर मौन बहुसंख्यक तुष्टिकरण का ही एक उदाहरण नहीं है? क्या डूब जाने के डर से धारा के साथ प्रवाह धारा को मौन सहमति नहीं है? दिल्ली चुनाव के परिणामों ने विमर्श के एक बड़े मैदान का निर्माण कियाContinue reading “आप जीती तो, पर छोड़ गई कुछ सवाल!”